Saturday, October 16, 2010

Maa

मां मैं नहीं भीख मांगता दुःख हरण की,
मैं तो भीख मांगता हूँ तेरे चरण की। माँ ॥
मां मैं इच्छुक हूँ तेरे वरन की,
मैं नहीं भीख मांगता दुःख हरण की।

Friday, October 15, 2010

GAM

गमे दिल की हम बात क्या करें,
दर्द भरे दिल से मुलाकात क्या करें।
हर पग पर रुलाया है हमें किस्मत ने,
रात बुरी हो या khushनुमा,
किसी रात की हम बात क्या करें
मेरी हँसी देख समझते हैं आप
बड़ा खुश हूँ मैं,
पर आपने यह नहीं सोचा
बाहर से खुश पर भीतर से कितना मायूस हूँ मैं।
इस हंसी को तो मैं यूँ ही दर्शाया करता हूँ,
खुद रोकर दूसरों को हंसाया करता हूँ।
पर ये सुन आप होना मायूस
आज दिल की बात जुबान पर गयी
इसलिए दिल का दर्द बयां करता हूँ।
दिल का दर्द बयां करता हूँ।
दर्द से हर रोज मरता हूँ हर रोज जीता हूँ
इसलिए आज दिल का दर्द बयां करता हूँ।
कभी सोचता हूँ यही है मेरी किस्मत
कभी सोचता हूँ मैंने ही बने ये किस्मत।
यही सोचकर बार बार टूटता हूँ
टूट कर फिर अपने कामो में जुटता हूँ
यदि मैं हँसता हूँ तो दुनिया हँसती है
यदि मैं रो दूँ तो कोई नहीं हैं रोने वाला साथ
फिर मैं क्यों रोऊ जिंदगी का दिन हो या रात।
आप ही बताएं
हम गमे दिल की बात क्या करें
दर्द भरें दिल से मुलाकात का क्या करें।
रात बुरी या खुशनुमा, किसी रात की हम बात क्या करें।
उपेन्द्र