तकलीफों भरी जिंदगी
जीने में भी मजा आता है।
जैसे प्यार का मारा आदमी सडक़ों पर हर वक्त तडफ़ड़ाता है।
कभी वह मोहब्बत में जीता है,
कभी अपने को तन्हाइयों में पाता है।
इसी मोहब्बत- तन्हाइयों के बीच
चलता जाता है, चलता जाता है।
जब लौटता है हकीकत में तो,
खूद के अंगों से ही मरा हुआ पाता है।
अब परिवार के प्रति तडफ़ड़ाता है,
लेकिन कुछ नहीं कर पाता है।
फिर भी दोस्तों ये क्या कम है कि
वह यूं ह७ी खुशी व गम में जिंदगी गुजार ले जाता है।
यहां तो गुजरना ही मुश्किल है,
याद भी नहीं और याद भी आता है।
अभी तो सभी अंग कर रहे हैं काम,
फिर भी मन कदम बढ़ाने से हिचकिचाता है।
परिवार के बोझ तले दबा हूं यारो,
मन मचल जाता है, मन मचल जाता है।