ससुरा आज कैसे दांत रहा है चियार।
मांग रहा वोट, कह रहा है हम ही कराएंगे आपका उद्धार,
अभी साला कल किया था गुलब्बों की मम्मी से छेड़छाड़,
लाल बत्ती में बैठाकर बुलाया पूजा को,
ससुरा अपने ही घर में कर दिया बलात्कार।
पूजा मारे लाज के चढ़ गयी फांसी पर,
उसकी मम्मी का है रो-रोकर आज बुरा हाल।
अरे, क्या कहें इसकी ऐसी की तैसी,
गुस्सा तो बहुत है लेकिन मैं व्यवस्था से गया हूँ हार।
तुम कहोगे मैंने ही तो चुना है इसे,
मैंने ही दिया है इसको लाल बत्ती।
फिर इसकी गलती क्या है
क्यों दे रहे इसको दुलत्ती।
इसका भी है एक बहुत बड़ा राज।
जानते हो पिछले चुनाव से पहले की बात है,
थाने वालों ने बुलाया था हमें, होना था उनसे दो-चार।
गया था मैं अटल जी के दरवाजे पर,
उन्होंने फोन किया बोला थानेदार साहब,
ये है हमारे करीबी और समझिये इन्हें रिश्तेदार।
उसने हंस कर कहा, अब नहीं साहब है आपकी सरकार।
उस नेता ससुरा के यहाँ गया मैं,
उसने बोला हड़काकर अबे साले थानेदार।
यदि काम नहीं हुआ इसका तो समझो तुम
जाओगे परलोक सिधार।
थानेदार ने दांत दिया चियार और कहा साहब
आप घबड़ायें नहीं, इनका मैं खुद करूंगा सत्कार
और क्या कहें भाई, वह हमारे पैरों पर गिर गया
थाने में बैठाकर खूब किया आदर-सत्कार।
इसी खातीर नेता ससुरे को मैं बैठाया सिर आँखों पर
और भेज दिया विधान सभा के द्वार, विधान सभा द्वार।
मांग रहा वोट, कह रहा है हम ही कराएंगे आपका उद्धार,
अभी साला कल किया था गुलब्बों की मम्मी से छेड़छाड़,
लाल बत्ती में बैठाकर बुलाया पूजा को,
ससुरा अपने ही घर में कर दिया बलात्कार।
पूजा मारे लाज के चढ़ गयी फांसी पर,
उसकी मम्मी का है रो-रोकर आज बुरा हाल।
अरे, क्या कहें इसकी ऐसी की तैसी,
गुस्सा तो बहुत है लेकिन मैं व्यवस्था से गया हूँ हार।
तुम कहोगे मैंने ही तो चुना है इसे,
मैंने ही दिया है इसको लाल बत्ती।
फिर इसकी गलती क्या है
क्यों दे रहे इसको दुलत्ती।
इसका भी है एक बहुत बड़ा राज।
जानते हो पिछले चुनाव से पहले की बात है,
थाने वालों ने बुलाया था हमें, होना था उनसे दो-चार।
गया था मैं अटल जी के दरवाजे पर,
उन्होंने फोन किया बोला थानेदार साहब,
ये है हमारे करीबी और समझिये इन्हें रिश्तेदार।
उसने हंस कर कहा, अब नहीं साहब है आपकी सरकार।
उस नेता ससुरा के यहाँ गया मैं,
उसने बोला हड़काकर अबे साले थानेदार।
यदि काम नहीं हुआ इसका तो समझो तुम
जाओगे परलोक सिधार।
थानेदार ने दांत दिया चियार और कहा साहब
आप घबड़ायें नहीं, इनका मैं खुद करूंगा सत्कार
और क्या कहें भाई, वह हमारे पैरों पर गिर गया
थाने में बैठाकर खूब किया आदर-सत्कार।
इसी खातीर नेता ससुरे को मैं बैठाया सिर आँखों पर
और भेज दिया विधान सभा के द्वार, विधान सभा द्वार।