-आग

धधक रही है दिल की आग
बन्दे तू जल्दी जाग
निकाल जल्द म्यान से तलवार,
इन कुरीतियों को मार सके तो maara
मैं जगा रहा हूं तुझे,
क्योंकि खुद मेरी कलम सो गयी है आज,
क्यों दबा हूं मैं,
किसने दबाया मुझे
अच्छा होगा ये तू ना जानो raj
nahin तो तू भी दब जाओगे इन मांफियाओं के चंगुल में,
भाई समय है उठा ले तलवार तू aaja.
lakshmii की ईच्छा ना करना too
kalam के सिपाहियों से भी ना डरना too
jindaa रहने के लिए बार-बार मरना too
sadaa पिड़ितों का दुख हरना too
hamaaraa ना करना तू intajaar
vakt आए तो देना मुझको भी मार,
तभी दुष्टों से मुक्त हो पाएगा sansaar
mujhe मारने में कांपे तेरी तलवार,
तो याद करना अर्जून का गुरु पर किया vaar
aaj सख्त आवश्यकता है एक महाभारत की,
जिसका अगुवा बन जा तू,
तेज कर लो मन की dhaar.
bajaa दे शंख रण की too
harishchand का आंचल छोड़ आज अर्जून बन जा too
jisane तुझे जन्माया hai
kal भी पाला,
कल के लिए भी भोजन जुटाया hai
kyaa उसकी तड़फड़ाहट में too marmaahat नहीं होगे aaj
aare तू इस मर्म को samajho
hijade समाज के शर्म को samajho
bhaaee उठा ले तलवार कभी ना मानना हार,
कभी ना मानना हार।