दुनिया को इंकलाब की याद आ रही है आज,
दुनिया को इंकलाब की याद आ रही है आज,
तारीख अपने आप को दोहरा रही है आज।
वो सर उठाये मौज ए फना आ रही है आज
मौज ए हयात मौत से टकरा रही है आज।
मित्रों,
सन 1941 में लिखी गयी फिराक गोरखपुरी की ये पंक्तियां आज बिल्कु ल सटीक उतर रही हैं। गांधी जी ने कहा था कि यदि हम किसी पापी को खत्म करते हैं तो उसका पाप खुद में आ जाता है। इसलिए उसके दुर्गुणों को खत्म करने का सत्याग्रह होना चाहिए। आज वही सत्याग्रह शुरू है और एक गाँव से निकले अन्ना की एक आवाज पर पूरा भारत ही नहीं विदेशों में भी नारों की गूंज हो रही है। सभी लोग आज त्रस्त हैं भ्रष्टाचार के दलदल से।
यदि बीच-बीच में कोई विरोधी स्वर उठते हैं तो उससे घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि अच्छे कामों का संकल्प लेने पर बुराई तो उसे हमेशा दबाने की क८ोशिश की ही है। सिर्फ देखना यह होगा कि वह बुराई कहीं इस टीम में ना आ जाये। वैसे खादीधारी जीतोड़ कोशिश में लगे हैं कि इस टीम को तोड़ दें। इसीलिए इस समय मौन हैं। घरों में बैठ तोडऩा का प्रयास जारी है। वैसे उनको पता होना चाहिए कि यह जन आंदोलन है। इसे कुछ समय के लिए दबाया भले जा सकता है लेकिन अंतरात्मा की आवाज को कभी कुचला नहीं जा सकता। यह कभी ना कभी शोला बनकर खाक कर देगी। जितना दबाने की कोशिश होगी वह उतना ही धधकेगी।
देख तो रहे हैं। अभी 72 साल के जवान में जो उर्जा है वह 32 साल में देखने को नहीं मिलेगी। 72 घंटे भूखे रहने के बावजूद कैसी दौड़ लगायी गाँधी के समाधि की आेर। अब भी कैसी बुलंद आवाज निकल रही है रामलीला मैदान से।
लेकिन खादीधारी चोर दुबके पड़े हैं। इस दुबकने और जनता की आवाज ना समझने के पीछे भी एक कारण है। आप थोड़ा गौर करें तो जितने सलाहकार परषद में बैठे तथाकथित नेता हैं। अधिकांश जनता के बीच के नहीं, बल्कि कहीं न कहीं हाई-प्रोफाइल कम्यूनिटी और आफिसों से निकले लोग हैं।
फिर भी मित्रों घबराने की जरूरत नहीं है। ना रुकेंगे, ना थकेंगे, कभी ना कभी तो ये चोर थकेंगे।
धैर्य के लिए धन्यवाद
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